Rakesh Khedar
Discussion on opinions.
Saturday, February 6, 2016
ज़िन्दगी- एक कप चाय, एक गजल/ नज्म/ नगमा, बिखरी कुछ कागजों की कतरनें, कुछ अपनी सी यादें, कुछ अच्छी दोस्त किताबें, और और बस हँसता व नाचता मोर सा मन! बस यहीं हैं यहीं हैं ज़िन्दगी!
😊
Wednesday, May 6, 2015
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